स्कूलों में अब पढ़ाई जाएगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: 11वीं-12वीं के लिए AI की किताबें तैयार करेगा NCERT, गठित हुई विशेष टीम
नई दिल्ली।
भारत में स्कूली शिक्षा अब एक नए डिजिटल दौर में प्रवेश करने जा रही है। बदलती तकनीक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने एक बड़ा कदम उठाया है। NCERT अब 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करने जा रहा है। इसके लिए एक विशेष टेक्स्टबुक डेवलपमेंट टीम का गठन किया गया है।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा 2023 (NCF-SE 2023) के अनुरूप की जा रही है। इसका उद्देश्य छात्रों को स्कूल स्तर पर ही AI जैसी उभरती तकनीकों से परिचित कराना है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
क्यों जरूरी हो गई AI की पढ़ाई?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज केवल एक तकनीकी शब्द नहीं रह गया है। यह हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुका है—चाहे वह मोबाइल फोन का वॉयस असिस्टेंट हो, ऑनलाइन सुझाव देने वाले सिस्टम हों या फिर हेल्थकेयर और ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल हो रही स्मार्ट तकनीकें।
शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि आने वाले समय में AI से जुड़ी स्किल्स हर क्षेत्र में जरूरी होंगी। ऐसे में छात्रों को कॉलेज या नौकरी से पहले ही AI की बुनियादी समझ देना बेहद अहम है। यही वजह है कि अब स्कूल स्तर पर ही AI को व्यवस्थित तरीके से पढ़ाने की योजना बनाई गई है।
11वीं और 12वीं के लिए AI सिलेबस और किताबें

शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि NCERT ने कक्षा 11 और 12 के लिए AI का सिलेबस और टेक्स्टबुक तैयार करने हेतु एक टेक्स्टबुक डेवलपमेंट टीम बनाई है। यह टीम विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और तकनीकी जानकारों के सहयोग से काम करेगी।
इन किताबों में:
- AI के बुनियादी सिद्धांत
- मशीन लर्निंग की शुरुआती समझ
- डेटा और एल्गोरिदम की भूमिका
- AI के नैतिक और सामाजिक पहलू
- वास्तविक जीवन में AI के उपयोग
जैसे विषयों को छात्रों की समझ के अनुरूप सरल भाषा में शामिल किया जाएगा।
छोटी कक्षाओं से ही AI की नींव
सरकार की योजना सिर्फ सीनियर क्लास तक सीमित नहीं है। शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से कक्षा 3 से ही सभी स्कूलों में AI से जुड़ा करिकुलम लागू किया जाएगा।
इसका उद्देश्य यह है कि:
- छोटी उम्र से ही बच्चों में तकनीकी सोच विकसित हो
- AI को डर या जटिल विषय की बजाय एक उपयोगी टूल के रूप में समझाया जाए
- छात्रों की तार्किक और विश्लेषणात्मक क्षमता बढ़े
यह पूरा ढांचा NEP 2020 और NCF-SE 2023 के दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयार किया जा रहा है।
CBSE ने भी तैयार किया AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग का सिलेबस

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 3 से 12 तक के छात्रों के लिए AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग का सिलेबस तैयार कर लिया है।
इस सिलेबस के तहत:
- निचली कक्षाओं में AI के बेसिक कॉन्सेप्ट्स समझाए जाएंगे
- कक्षा 6 से 8 तक लॉजिकल थिंकिंग और समस्या समाधान पर जोर होगा
- कक्षा 9 और 10 में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI को जरूरी विषय के रूप में शामिल किया जाएगा
- 11वीं और 12वीं में AI को गहराई से पढ़ाया जाएगा
इससे छात्रों को धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से AI की समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।
ग्रेड 6 की किताबों में भी AI का प्रयोग
AI को केवल सैद्धांतिक विषय तक सीमित नहीं रखा गया है। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि NCERT ने ग्रेड 6 की वोकेशनल एजुकेशन की टेक्स्टबुक में एक खास प्रोजेक्ट शामिल किया है, जिसमें एनिमेशन और गेम्स के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल किया गया है।
इसका मकसद:
- पढ़ाई को ज्यादा रोचक बनाना
- बच्चों को “करके सीखने” का मौका देना
- तकनीक को किताबों से जोड़ना
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रोजेक्ट बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ाते हैं और जटिल विषयों को आसान बना देते हैं।
SOAR पहल: AI रेडीनेस के लिए राष्ट्रीय मिशन
AI शिक्षा को एक व्यापक रूप देने के लिए भारत सरकार ने SOAR (Skilling for AI Readiness) नाम की एक राष्ट्रीय पहल शुरू की है। यह पहल NEP 2020, नेशनल प्रोग्राम ऑन AI (NPAI), स्किलिंग फ्रेमवर्क और विकसित भारत 2047 के विजन से जुड़ी हुई है।
SOAR का मुख्य उद्देश्य:
- कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों में AI को लेकर जागरूकता बढ़ाना
- AI की बुनियादी क्षमताएं विकसित करना
- शिक्षकों के बीच AI लिटरेसी को मजबूत करना
- डिजिटल डिवाइड को कम करना
सरकार का कहना है कि यह पहल देशभर में AI शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
SOAR करिकुलम की खास संरचना
SOAR करिकुलम को चार प्रोग्रेसिव मॉड्यूल्स में बांटा गया है, जो नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NSQF) से जुड़े हुए हैं।
कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए तीन तरह के माइक्रो-क्रेडेंशियल तय किए गए हैं:
- AI to be Aware
- AI की बुनियादी जानकारी
- रोजमर्रा की जिंदगी में AI का उपयोग
- अवधि: 15 घंटे
- AI to Acquire
- AI से जुड़ी स्किल्स का विकास
- डेटा और लॉजिक की समझ
- अवधि: 15 घंटे
- AI to Aspire
- AI में करियर की संभावनाएं
- एडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स का परिचय
- अवधि: 15 घंटे
इस तरह कुल 45 घंटे का संरचित करिकुलम छात्रों को दिया जाएगा।
शिक्षकों की भूमिका भी होगी अहम
AI शिक्षा को सफल बनाने के लिए केवल किताबें ही काफी नहीं होंगी। सरकार और NCERT इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि शिक्षकों को AI के लिए प्रशिक्षित किया जाए। SOAR पहल के तहत शिक्षकों के लिए भी विशेष ट्रेनिंग और लर्निंग मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं।
इससे:
- शिक्षक आत्मविश्वास के साथ AI पढ़ा सकेंगे
- छात्रों को सही मार्गदर्शन मिलेगा
- स्कूलों में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी
भारत को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि AI को स्कूल शिक्षा में शामिल करना भारत के लिए एक रणनीतिक फैसला है। इससे:
- छात्र भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार होंगे
- इनोवेशन और स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा मिलेगा
- भारत वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में मजबूत होगा
निष्कर्ष: स्कूल शिक्षा में AI एक नई शुरुआत
11वीं और 12वीं के लिए AI की किताबें तैयार करने का NCERT का फैसला भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह पहल न सिर्फ छात्रों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाएगी, बल्कि उन्हें भविष्य के डिजिटल भारत का सक्रिय हिस्सा भी बनाएगी।
NEP 2020, NCF-SE 2023 और SOAR जैसी पहलों के साथ भारत अब उस दिशा में बढ़ रहा है, जहां स्कूल के छात्र सिर्फ किताबें पढ़ने वाले नहीं, बल्कि तकनीक को समझने और इस्तेमाल करने वाले नागरिक बनेंगे।
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