Friday, February 27, 2026
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AI रेस में xAI का विस्तार, खरीदी तीसरी बिल्डिंग

Elon Musk का बड़ा AI दांव: xAI ने खरीदी तीसरी बिल्डिंग, 2 गीगावॉट तक बढ़ेगी कंप्यूट पावर

ChatGPT और Claude को टक्कर देने की तैयारी, पर्यावरण को लेकर भी उठे सवाल

दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस जैसे-जैसे तेज होती जा रही है, वैसे-वैसे टेक दिग्गज अपने संसाधनों को कई गुना बढ़ाने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में टेस्ला और X (पूर्व में ट्विटर) के मालिक एलन मस्क ने एक और बड़ा कदम उठाया है। मस्क की AI स्टार्टअप xAI ने अपनी कंप्यूट क्षमता बढ़ाने के लिए तीसरी बिल्डिंग खरीद ली है, जिससे कंपनी का लक्ष्य करीब 2 गीगावॉट (2,000 मेगावॉट) तक AI कंप्यूट पावर पहुंचाने का है।

एलन मस्क ने मंगलवार को खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस जानकारी की पुष्टि की। उन्होंने लिखा कि xAI ने एक तीसरी बिल्डिंग खरीदी है, जिसका नाम “MACROHARDRR” रखा गया है। हालांकि मस्क ने इसकी लोकेशन सार्वजनिक नहीं की, लेकिन नाम को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि यह माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) पर एक व्यंग्यात्मक संकेत हो सकता है।


xAI की महत्वाकांक्षा: OpenAI और Anthropic को सीधी चुनौती

xAI का यह ताजा विस्तार साफ संकेत देता है कि एलन मस्क अब AI की वैश्विक रेस में किसी से पीछे रहने के मूड में नहीं हैं। कंपनी का मकसद सीधे तौर पर OpenAI के ChatGPT और Anthropic के Claude जैसे पॉपुलर AI मॉडल्स को टक्कर देना है।

xAI पहले ही अपने सुपरकंप्यूटर क्लस्टर “Colossus” को लेकर चर्चा में रहा है। यह सुपरकंप्यूटर अमेरिका के टेनेसी राज्य के मेम्फिस (Memphis) में स्थित है और इसे दुनिया के सबसे बड़े AI सुपरकंप्यूटर क्लस्टर्स में से एक माना जाता है। अब तीसरी बिल्डिंग के जुड़ने से xAI की ट्रेनिंग कैपेसिटी और भी तेज़ी से बढ़ेगी।


10 लाख GPU का लक्ष्य, AI ट्रेनिंग में आएगी रफ्तार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, xAI की योजना अपने Colossus सुपरकंप्यूटर को इतना बड़ा बनाने की है कि उसमें कम से कम 10 लाख (1 मिलियन) GPU लगाए जा सकें। GPU यानी ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट AI मॉडल्स को ट्रेन करने का सबसे अहम हार्डवेयर होता है।

जितने ज्यादा GPU, उतनी ज्यादा ताकतवर AI ट्रेनिंग—और उतने ही ज्यादा एडवांस मॉडल। यही वजह है कि OpenAI, Google, Meta और अब xAI जैसे खिलाड़ी डेटा सेंटर्स और सुपरकंप्यूटिंग पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं।


2026 से बनेगा नया डेटा सेंटर

टेक इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि xAI 2026 से नई खरीदी गई वेयरहाउस बिल्डिंग को डेटा सेंटर में बदलने का काम शुरू करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया डेटा सेंटर और “Colossus 2” दोनों ही ऐसी जगह बनाए जा रहे हैं, जो एक नेचुरल गैस पावर प्लांट के बेहद करीब हैं।

दिलचस्प बात यह है कि यह पावर प्लांट भी xAI ही बना रही है, ताकि AI डेटा सेंटर्स को लगातार और भरोसेमंद बिजली मिलती रहे। इसके अलावा कंपनी अन्य ऊर्जा स्रोतों को भी इस्तेमाल में लाने की तैयारी कर रही है।


2 गीगावॉट कंप्यूट पावर का क्या मतलब?

आम आदमी के लिए 2 गीगावॉट कंप्यूट पावर का मतलब समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। आसान भाषा में कहें तो:

  • 2 गीगावॉट बिजली से लाखों घरों को एक साथ बिजली दी जा सकती है
  • इतनी पावर AI के सबसे बड़े और जटिल मॉडल्स को ट्रेन करने में सक्षम होती है
  • यह स्तर दुनिया के सबसे बड़े टेक डेटा सेंटर्स के बराबर माना जाता है

यानी xAI अब सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर का एक विशाल खिलाड़ी बनता जा रहा है।


पर्यावरण को लेकर बढ़ती चिंता

हालांकि xAI का यह विस्तार तकनीकी दुनिया के लिए बड़ा कदम है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण को लेकर चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि AI डेटा सेंटर्स भारी मात्रा में:

  • बिजली की खपत करते हैं
  • पानी का इस्तेमाल करते हैं (कूलिंग के लिए)
  • कार्बन उत्सर्जन बढ़ाते हैं

खासतौर पर जब डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए नेचुरल गैस जैसे ईंधन का इस्तेमाल होता है, तो यह जलवायु परिवर्तन की समस्या को और गंभीर बना सकता है।


एलन मस्क का AI विज़न

एलन मस्क पहले भी AI को लेकर अपनी चिंता और महत्वाकांक्षा जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि AI मानवता के लिए सबसे बड़ा अवसर भी है और सबसे बड़ा खतरा भी। xAI की स्थापना का मकसद उन्होंने “truth-seeking AI” बताया था—यानी ऐसा AI जो ज्यादा पारदर्शी और मानव हित में हो।

अब जिस रफ्तार से xAI अपना इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रही है, उससे साफ है कि मस्क AI की इस जंग में लंबी और बड़ी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।


निष्कर्ष

xAI द्वारा तीसरी बिल्डिंग की खरीद और 2 गीगावॉट कंप्यूट पावर का लक्ष्य यह दिखाता है कि आने वाले सालों में AI की प्रतिस्पर्धा और भी तेज होने वाली है। जहां एक ओर इससे ज्यादा स्मार्ट और ताकतवर AI मॉडल सामने आएंगे, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े सवाल भी उतने ही अहम बनते जाएंगे।

अब देखना यह होगा कि एलन मस्क की xAI इस रेस में OpenAI और Anthropic को कितनी कड़ी चुनौती दे पाती है—और क्या यह तकनीकी तरक्की पर्यावरण के साथ संतुलन बना पाएगी या नहीं।

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