IndiGo के बड़े ऑपरेशनल संकट पर CEO एल्बर्स ने जताया खेद: 1000+ फ्लाइटें रद्द, कंपनी ने बताई वापसी की समयसीमा
देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन IndiGo इन दिनों अपने अस्तित्व के सबसे गंभीर परिचालन संकट से जूझ रही है। बीते कुछ दिनों में जो स्थिति सामने आई, उसने लाखों यात्रियों की यात्रा योजनाओं को प्रभावित किया है और हवाई यात्रा प्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 5 दिसंबर का दिन इस संकट का चरम साबित हुआ, जब एयरलाइन को अपने इतिहास की सबसे बड़ी रद्दीकरण कार्रवाई करनी पड़ी—एक ही दिन में 1000 से अधिक उड़ानें रद्द, जो कि IndiGo के कुल दैनिक परिचालन का आधे से भी अधिक हिस्सा है।

इस अभूतपूर्व स्थिति को देखते हुए एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पीटर एल्बर्स ने एक वीडियो संदेश जारी कर यात्रियों से ईमानदारीपूर्वक माफी मांगी और संकट के कारणों तथा उठाए जा रहे कदमों पर विस्तार से बात की। एल्बर्स ने माना कि यह समय IndiGo के लिए बेहद कठिन है और उनकी प्राथमिकता केवल एक—यात्रियों की परेशानी को हर संभव तरीके से कम करना—है।
संकट कैसे गहरा, क्या रहे मुख्य कारण?
हालांकि एल्बर्स ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि संकट किस वजह से पैदा हुआ, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि यह स्थिति एक दिन में नहीं बनी और इसके पीछे कई परतें हो सकती हैं—जैसे ऑपरेशनल मैनेजमेंट में रुकावटें, क्रू की उपलब्धता, मौसम संबंधी प्रभाव, या अन्य आंतरिक असंतुलन।
एविएशन विश्लेषकों के अनुसार, किसी भी बड़े नेटवर्क में किसिंग-इफेक्ट (Domino Effect) की संभावना रहती है—एक सेक्टर में देरी अगले सेक्टर को प्रभावित करती जाती है। यदि क्रू शेड्यूलिंग में केवल 10–15% की भी रुकावट आ जाए, तो यह पूरे नेटवर्क को ठप कर सकती है। यही इस बार IndiGo के साथ भी देखने को मिला।
IndiGo के लिए यह स्थिति और भी खराब इसलिए दिखी, क्योंकि इसके पास अन्य घरेलू कंपनियों की तुलना में कहीं बड़ा फ्लीट और विशाल नेटवर्क है। एक छोटे से भी अव्यवस्था के बड़े परिणाम निकलते हैं।
CEO एल्बर्स की साफ स्वीकारोक्ति: “आपकी परेशानी हमारी जिम्मेदारी”
अपने वीडियो संदेश में एल्बर्स ने कहा:
“5 दिसंबर हमारे लिए सबसे खराब दिन था। हजार से अधिक उड़ानों का रद्द होना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों यात्रियों की असुविधा का प्रतीक था। हम इस चुनौती से पूरी ईमानदारी और गंभीरता के साथ निपट रहे हैं।”
उनका स्वर न केवल क्षमायाचना का था बल्कि यह भरोसा भी दिलाने वाला था कि कंपनी इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने खासतौर पर यह कहा कि एयरलाइन की प्राथमिकता ‘किसे दोष देना है’ नहीं, बल्कि ‘कैसे प्रभावी समाधान देना है’ पर केंद्रित है।
IndiGo की तीन-स्तरीय रणनीति: संकट प्रबंधन से लेकर पूर्ण ऑपरेशनल रीसेट तक

संकट को काबू में लाने के लिए IndiGo ने तीन-स्तरीय योजना लागू की है। यह बताता है कि केवल अस्थायी फैसलों से बात नहीं बनेगी, बल्कि एयरलाइन अपने परिचालन को गहराई से रीसेट कर रही है।
1. ग्राहक संचार व सहायता प्रणाली में मजबूती
एयरलाइन ने माना कि संकट के समय यात्रियों तक सही और समय पर जानकारी पहुंचना सबसे महत्वपूर्ण है। इसी कारण:
- कॉल सेंटर की क्षमता कई गुना बढ़ाई गई।
- यात्रियों को रेगुलर अपडेट, एप्प नोटिफिकेशन, एसएमएस और ईमेल के जरिए निरंतर जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
- अत्यधिक प्रतीक्षा समय कम करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया गया।
- हवाई अड्डों पर हेल्प-डेस्क बढ़ाए गए और यात्रियों को रियल-टाइम स्टेटस बताया जा रहा है।
यह कदम दिखाता है कि IndiGo केवल उड़ाने बहाल करने पर नहीं, बल्कि यात्रियों के अनुभव को सुलभ बनाने पर ध्यान दे रही है।
2. स्टक यात्रियों को तत्काल राहत
हजारों यात्री भारत के विभिन्न बड़े हवाई अड्डों पर फंसे पड़े थे—दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे प्रमुख केंद्रों पर भीड़ सामान्य दिनों से कई गुना अधिक थी। इस स्थिति को देखते हुए:
- IndiGo ने एयरपोर्ट टीम को विस्तारित किया ताकि यात्रियों को तुरंत सहायता मिल सके।
- खाद्य एवं पेय पदार्थ, वाउचर, होटल व्यवस्था (जहां आवश्यक) जैसी त्वरित सुविधाएं दी गईं।
- जिन फ्लाइट्स को एयरलाइन को रद्द करना पड़ा, उनके यात्रियों से अनुरोध किया गया कि वे अनावश्यक रूप से एयरपोर्ट न जाएं, जिससे भीड़ कम हो सके और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो।
यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहा।
3. पूर्ण ऑपरेशनल रीसेट—सबसे कठिन लेकिन सबसे जरूरी कदम
एल्बर्स ने विशेष रूप से इस तीसरे कदम को ‘सबसे महत्वपूर्ण’ बताया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में एयरलाइन ने कुछ मूलभूत सुधारात्मक कदम उठाए, लेकिन वे अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए। इसके बाद IndiGo ने एक पूर्ण ऑपरेशनल रीसेट की प्रक्रिया शुरू की है।
यह रीसेट प्रक्रिया शामिल करती है:
- क्रू शेड्यूल का पुनर्गठन
- फ्लाइट-रूट्स का अस्थायी ऑप्टिमाइजेशन
- विमानों की अदला-बदली और उपलब्धता का संतुलन
- नए शेड्यूल का निर्माण, ताकि किसी भी सेक्टर पर अत्यधिक दबाव न आए
- नेटवर्क में जहां-जहां ओवरलैप या असंतुलन था, उन्हें हटाना
यह किसी कंप्यूटर सिस्टम को ‘हार्ड रीसेट’ करने जैसा कदम है—समय लेता है, लेकिन परिणाम स्थायी होते हैं।
कब होगा सब सामान्य? CEO का स्पष्ट टाइमलाइन
यात्रियों के मन में सबसे बड़ा प्रश्न यही है—इंडिगो की उड़ानें कब पटरी पर लौटेंगी?
एल्बर्स ने इस पर स्पष्ट समयसीमा देते हुए कहा:
- अगले दिन (यानी 6 दिसंबर) से रद्द होने वाली उड़ानों की संख्या 1000 से कम हो जाएगी।
- नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) का पूरा सहयोग मिल रहा है।
- एयरलाइन उम्मीद करती है कि 10 से 15 दिसंबर के बीच संचालन पूरी तरह सामान्य स्थिति में लौट आएगा।
यानी, यात्रियों को कुछ और दिनों तक धैर्य रखना होगा, लेकिन सुधार की प्रक्रिया पूरी गंभीरता से चल रही है।
DGCA की भूमिका: संकट प्रबंधन में अहम सहायता
DGCA ने इस स्थिति को ‘गंभीर परिचालन बाधा’ मानते हुए एयरलाइन के साथ लगातार संपर्क रखा है। नियामक ने सुनिश्चित किया कि:
- यात्रियों को रिफंड और विकल्प बिना किसी परेशानी के मिलें।
- एयरलाइन कोई अत्यधिक बुकिंग न करे।
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
DGCA का यह सक्रिय रुख इस संकट को तेजी से काबू में लाने में बड़ा योगदान दे रहा है।
यात्रियों की प्रतिक्रिया: गुस्सा, चिंता और उम्मीद
सोशल मीडिया इस संकट की गूंज से भरा पड़ा है। कई यात्रियों ने:
- आखिरी समय पर फ्लाइट रद्द होने पर नाराजगी जताई
- एयरपोर्ट पर घंटों इंतजार की शिकायत की
- परिवारों, बच्चों और बुजुर्गों के साथ हुए असुविधाजनक अनुभव बताए
लेकिन दूसरी ओर, एल्बर्स के संदेश के बाद यात्रियों का एक वर्ग यह महसूस कर रहा है कि एयरलाइन कम-से-कम समस्या को स्वीकार कर रही है और समाधान की दिशा में कड़ी मेहनत कर रही है।
IndiGo के लिए सीख और आगे की रणनीति
यह संकट IndiGo के लिए केवल अस्थायी परिचालन समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ा प्रबंधन सबक भी लेकर आया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राहकों का भरोसा बहाल करना कंपनी का सबसे बड़ा लक्ष्य होगा। इसके लिए IndiGo को:
- क्रू मैनेजमेंट सिस्टम में तकनीकी सुधार
- आकस्मिक परिस्थितियों के लिए वैकल्पिक योजना
- यात्रियों के साथ प्री-एम्प्टिव संचार
- और सबसे महत्वपूर्ण—नेटवर्क में ऐसे बदलाव करने होंगे, जिससे भविष्य में इस तरह का संकट दोबारा न आए।
IndiGo का ब्रांड भारत में भरोसे का प्रतीक रहा है। इसलिए उसकी हर छोटी-बड़ी समस्या यात्रियों के अनुभव से सीधी जुड़ी होती है।
निष्कर्ष: संकट गहरा, लेकिन समाधान की दिशा मजबूत
कुल मिलाकर, IndiGo के सीईओ द्वारा दिया गया बयान यह स्पष्ट करता है कि एयरलाइन ने स्थिति की गंभीरता को समझ लिया है और अब सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
हालांकि अगले कुछ दिनों में यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन 10–15 दिसंबर तक स्थिति सामान्य होने की उम्मीदें स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी हैं।
IndiGo का यह संकट यह भी याद दिलाता है कि दुनिया की सबसे बड़ी एयरलाइनों को भी एक छोटे से अव्यवस्था के कारण बड़े स्तर की रुकावट का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन जिस पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ एयरलाइन ने प्रतिक्रिया दी है, उससे उम्मीद की जा सकती है कि वह जल्द ही अपने नियमित, समयनिष्ठ संचालन में लौट आएगी।
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