Mutual Fund से कमाए 1.35 करोड़ और टैक्स दिया 0! नोटिस के बाद भी कोर्ट से मिली राहत, NRI महिला का मामला बना मिसाल
भारत में निवेश करने वाले NRI निवेशकों के लिए यह मामला किसी बड़ी मिसाल से कम नहीं है। मुंबई की एक NRI महिला ने भारत में म्यूचुअल फंड निवेश से करीब 1.35 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, लेकिन इस पर भारत में एक भी रुपया टैक्स नहीं चुकाया। हैरानी की बात यह है कि इनकम टैक्स विभाग ने उन्हें नोटिस भी भेजा, दावा खारिज किया, लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) से महिला के पक्ष में फैसला आया। इस पूरे केस ने एक बार फिर भारत–सिंगापुर डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट (DTAA) की ताकत और सही टैक्स प्लानिंग की अहमियत को उजागर कर दिया है।
कैसे कमाए 1.35 करोड़ और क्यों नहीं लगा टैक्स?

दरअसल, यह महिला टैक्स उद्देश्यों के लिए सिंगापुर की रेजिडेंट थीं। उन्होंने भारत में इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड में निवेश किया था। बाद में जब उन्होंने इन निवेशों को बेचा, तो उन्हें शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) के रूप में करीब 1.35 करोड़ रुपये की आय हुई।
जब उन्होंने भारत में अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल किया, तो उन्होंने भारत–सिंगापुर DTAA के आर्टिकल 13 का हवाला दिया। महिला का कहना था कि इस कैपिटल गेन पर टैक्स लगाने का अधिकार केवल सिंगापुर को है, भारत को नहीं। इसलिए उन्होंने भारत में इस आय पर टैक्स नहीं दिया।
इनकम टैक्स विभाग की आपत्ति
इनकम टैक्स विभाग को महिला का यह दावा मंजूर नहीं था। विभाग का तर्क था कि:
- म्यूचुअल फंड यूनिट्स का मूल्य भारत में मौजूद संपत्तियों से जुड़ा होता है
- चूंकि निवेश भारत में किया गया है, इसलिए इस पर टैक्स भी भारत में लगना चाहिए
इसी आधार पर विभाग ने महिला को नोटिस भेजा और उनके टैक्स दावे को खारिज कर दिया। इसके बाद महिला ने डिस्प्यूट रेजोल्यूशन पैनल (DRP) का रुख किया, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली।
मामला पहुंचा ITAT तक
जब DRP से भी निराशा हाथ लगी, तो महिला ने आखिरकार मुंबई स्थित इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) में अपील दायर की। यहां महिला की ओर से एक बेहद अहम और तकनीकी दलील पेश की गई।
उनकी ओर से कहा गया कि:
- म्यूचुअल फंड यूनिट्स को कंपनी के शेयर नहीं माना जा सकता
- DTAA में शेयरों से होने वाले कैपिटल गेन और अन्य संपत्तियों से होने वाले गेन के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं
- इस मामले में आर्टिकल 13(5) लागू होता है, जो साफ कहता है कि ऐसी संपत्ति से हुई आय पर टैक्स का अधिकार केवल उस देश को होगा, जहां निवेशक टैक्स रेजिडेंट है
चूंकि महिला टैक्स उद्देश्यों के लिए सिंगापुर की रेजिडेंट थीं, इसलिए इस आय पर टैक्स लगाने का अधिकार भारत को नहीं बनता।
ट्रिब्यूनल का अहम फैसला
ITAT मुंबई ने महिला की दलीलों को स्वीकार करते हुए एक बेहद अहम फैसला सुनाया। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट रूप से कहा कि:

- भारतीय कानून के तहत म्यूचुअल फंड ट्रस्ट के रूप में बनाए जाते हैं, न कि कंपनी के रूप में
- इसलिए म्यूचुअल फंड की यूनिट्स को “शेयर” नहीं माना जा सकता
- जब यूनिट्स शेयर नहीं हैं, तो उन पर शेयरों से जुड़े टैक्स नियम लागू नहीं किए जा सकते
इसी आधार पर ITAT ने फैसला सुनाया कि इस महिला को म्यूचुअल फंड से हुए 1.35 करोड़ रुपये के कैपिटल गेन पर भारत में टैक्स नहीं देना होगा।
NRI निवेशकों के लिए क्यों है यह फैसला अहम?
यह फैसला खासतौर पर उन NRI निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो भारत में म्यूचुअल फंड, शेयर या अन्य वित्तीय साधनों में निवेश करते हैं। इस केस से तीन बड़ी बातें साफ होती हैं:
- DTAA का सही इस्तेमाल करने से डबल टैक्स से बचा जा सकता है
- टैक्स नोटिस मिलने के बाद भी कानूनी रास्ते खुले होते हैं
- म्यूचुअल फंड यूनिट्स को शेयर मानना गलत है, यह बात अब ट्रिब्यूनल स्तर पर साफ हो चुकी है
क्या हर NRI को मिलेगा यह फायदा?
हालांकि यह फैसला राहत देने वाला है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि हर NRI के मामले में स्थिति एक जैसी नहीं होगी। टैक्स रेजिडेंसी, निवेश का प्रकार, होल्डिंग पीरियड और DTAA की शर्तें—इन सभी पर टैक्स का फैसला निर्भर करता है। इसलिए निवेश से पहले और टैक्स रिटर्न फाइल करते समय एक्सपर्ट सलाह लेना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
मुंबई की इस NRI महिला का केस यह साबित करता है कि सही टैक्स ट्रीटी की समझ और मजबूत कानूनी दलीलों के जरिए बड़े से बड़े टैक्स नोटिस से भी राहत पाई जा सकती है। 1.35 करोड़ की कमाई और शून्य टैक्स—यह मामला न सिर्फ चर्चा में है, बल्कि आने वाले समय में NRI निवेशकों के लिए एक रेफरेंस केस भी बन सकता है।
ये भी पढ़ें: कौन हैं कार्तिक शर्मा? IPL ऑक्शन में मचा हंगामा


