Thursday, January 8, 2026
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नो हॉर्न संडे भारत का अनोखा स्टेशन

भारत का इकलौता रेलवे स्टेशन, जहां रविवार को नहीं बजती ट्रेन की सीटी — नाम सुनते ही चौंक जाएंगे आप

Railway Interesting Facts:
भारतीय रेलवे अपने विशाल नेटवर्क, तकनीकी नवाचारों और अनोखी खूबियों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों से लेकर पहाड़ों को चीरती रेलवे लाइनों तक, हर दिन रेलवे से जुड़ा कोई न कोई रोचक तथ्य सामने आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा रेलवे स्टेशन भी है, जहां रविवार को एक भी ट्रेन की सीटी (हॉर्न) नहीं बजती? यही नहीं, इस स्टेशन की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसका कोई आधिकारिक नाम तक नहीं है


भारत के अनोखे रेलवे स्टेशनों की लंबी सूची

भारत में कई ऐसे रेलवे स्टेशन हैं, जो अपनी अजीबोगरीब खूबियों के कारण चर्चा में रहते हैं।

  • नवापुर रेलवे स्टेशन, जो आधा महाराष्ट्र और आधा गुजरात में स्थित है
  • अटारी रेलवे स्टेशन, जहां जाने के लिए वीजा की जरूरत पड़ती है
  • वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपेटा, जो 28 अक्षरों वाला भारत का सबसे लंबा स्टेशन नाम माना जाता है

इसी सूची में शामिल है पश्चिम बंगाल का यह रहस्यमयी स्टेशन, जो रविवार को पूरी तरह शांत रहता है।


कहां स्थित है यह अनोखा स्टेशन?

यह अनोखा रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल के बर्धमान (वर्तमान में पूर्व बर्धमान) जिले में स्थित है।

  • बर्धमान शहर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर
  • बांकुड़ा–मासाग्राम रेलवे लाइन पर मौजूद
  • यह एक छोटा, ग्रामीण इलाका स्टेशन है

आमतौर पर यहां केवल बांकुड़ा–मासाग्राम पैसेंजर ट्रेन का ठहराव होता है।


रविवार को क्यों नहीं बजती ट्रेन की सीटी?

दरअसल, रविवार को इस स्टेशन पर हालात बिल्कुल अलग होते हैं—

  • रविवार के दिन कोई भी ट्रेन इस स्टेशन पर नहीं रुकती
  • बांकुड़ा–मासाग्राम पैसेंजर ट्रेन भी रविवार को संचालित नहीं होती
  • न ट्रेन आती है, न हॉर्न बजता है
  • स्टेशन पर पूरी तरह पिन-ड्रॉप साइलेंस रहता है

यानी न अनाउंसमेंट, न भीड़, न सीटी—बस सन्नाटा।


रविवार को स्टेशन क्यों रहता है बंद?

इस स्टेशन से जुड़ा एक और दिलचस्प कारण भी सामने आता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक—

  • रविवार को स्टेशन मास्टर टिकट खरीदने के लिए बर्धमान शहर चले जाते हैं
  • टिकट काउंटर और अन्य रेलवे सेवाएं उस दिन बंद रहती हैं
  • स्टाफ की अनुपस्थिति में स्टेशन पर ट्रेन संचालन संभव नहीं होता

यही वजह है कि रविवार को स्टेशन पूरी तरह निष्क्रिय रहता है।


सबसे चौंकाने वाली बात: स्टेशन का कोई नाम नहीं

इस स्टेशन की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि—

👉 इसका कोई आधिकारिक नाम नहीं है

  • न स्टेशन बोर्ड पर नाम लिखा है
  • न टिकट पर किसी नाम का उल्लेख
  • फिर भी यह स्टेशन वर्षों से अस्तित्व में है

स्थानीय लोग इसे बस

“लाइन वाला स्टेशन” या “पास का स्टेशन”
जैसे नामों से जानते हैं।


फिर भी क्यों जरूरी है यह स्टेशन?

नाम न होने के बावजूद यह स्टेशन स्थानीय लोगों के लिए काफी अहम है—

  • बांकुड़ा और मासाग्राम के बीच यात्रा करने वालों के लिए एक जरूरी ठहराव
  • आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों को रेल कनेक्टिविटी
  • पुराने दौर में ऐसे स्टेशन दूर-दराज के इलाकों को मुख्य रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए बनाए जाते थे

हालांकि, आज के समय में ई-टिकट, बड़े स्टेशन और एक्सप्रेस ट्रेनों के चलते ऐसे छोटे स्टेशनों की भूमिका बदल गई है।


रविवार और रेलवे: क्या होता है खास?

भारतीय रेलवे के लिए रविवार अक्सर मेंटेनेंस डे जैसा होता है—

  • बड़े पैमाने पर ट्रैक मरम्मत
  • सिग्नल और ओवरहेड लाइन का काम
  • कई रूट्स पर मेगा ब्लॉक

इसी वजह से

  • कुछ ट्रेनें लेट होती हैं
  • कुछ रद्द कर दी जाती हैं

यात्रियों को सलाह दी जाती है कि रविवार को सफर से पहले
👉 NTES या RailYatri ऐप पर ट्रेन स्टेटस जरूर चेक करें


पुराने जमाने की याद दिलाता है यह स्टेशन

आज जब रेलवे हाई-स्पीड ट्रेनों और स्मार्ट स्टेशनों की ओर बढ़ रहा है, ऐसे स्टेशन—

  • रेलवे के शुरुआती दौर की याद दिलाते हैं
  • बताते हैं कि कैसे छोटे-छोटे पड़ाव लोगों की जिंदगी का सहारा हुआ करते थे
  • भारतीय रेलवे के सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं

निष्कर्ष

भारत का यह अनोखा रेलवे स्टेशन सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि
रेलवे इतिहास का जीवित उदाहरण है—
जहां रविवार को न सीटी बजती है, न ट्रेन आती है, और न ही स्टेशन का कोई नाम है।

👉 यही तो है भारतीय रेलवे की खासियत—
हर स्टेशन की अपनी एक कहानी।

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