रूस की Rosatom ने कुडनकुलम प्लांट को पहुंचाया न्यूक्लियर फ्यूल, पुतिन के भारत आते ही पहली खेप मिली — जानें पूरी रिपोर्ट
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के पहले ही दिन मॉस्को से भारत को बड़ा न्यूक्लियर समर्थन मिला है। तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kudankulam Nuclear Power Plant – KKNPP) के लिए रूस की सरकारी न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन Rosatom ने न्यूक्लियर फ्यूल की पहली खेप भारत भेज दी है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत-रूस के सहयोग का यह ताज़ा अध्याय ऐसे समय में आगे बढ़ा है, जब दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने पर कई नई समझौतों की उम्मीद जताई जा रही है।
⭐ रूसी कार्गो फ्लाइट से भारत पहुंची पहली न्यूक्लियर फ्यूल खेप

Rosatom ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि
- उनका न्यूक्लियर फ्यूल डिवीजन द्वारा संचालित एक कार्गो एयरक्राफ्ट
- रूस के Novosibirsk Chemical Concentrate Plant (NCCP) में तैयार
- फ्यूल असेंबलियों की पहली खेप
तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम प्लांट को डिलीवर कर चुका है।
यह फ्यूल तीसरे VVER-1000 रिएक्टर की प्रारंभिक लोडिंग के लिए भेजा गया है।
⭐ रूस से कुल 7 खेप भेजी जाएंगी — पूरी लोडिंग और रिज़र्व फ्यूल शामिल
Rosatom ने बताया कि:
- कुडनकुलम के तीसरे रिएक्टर के पूरे कोर लोडिंग
- और रिज़र्व फ्यूल उपलब्ध कराने के लिए
कुल 7 कार्गो फ्लाइट्स भेजने की योजना है।
पहली खेप भेज दी गई है, बाकी खेप आने वाले सप्ताहों में पहुंचेंगी।
⭐ 2024 में हुआ था बड़ा कॉन्ट्रैक्ट — तीसरे और चौथे रिएक्टर के लिए लाइफटाइम फ्यूल सप्लाई
यह डिलीवरी उस बड़े एग्रीमेंट का हिस्सा है जो
2024 में भारत और रूस के बीच साइन हुआ था।
इस कॉन्ट्रैक्ट में शामिल है:
- शुरुआती फ्यूल लोडिंग
- नियमित ऑपरेशन के लिए फ्यूल सप्लाई
- तीसरे और चौथे दोनों VVER-1000 रिएक्टरों की पूरी लाइफटाइम सर्विस
कुडनकुलम प्लांट भारत का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट माना जाता है।
⭐ कुडनकुलम – भारत का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट

कुडनकुलम में कुल 6 रिएक्टरों का निर्माण प्रस्तावित है, जिनकी क्षमता होगी:
- 6 × 1000 MW = 6000 MW कुल क्षमता
पहले दो रिएक्टर:
- यूनिट-1 → 2013 में ग्रिड से जुड़ा
- यूनिट-2 → 2016 में ऑपरेशन शुरू
बाकी चार (रिएक्टर 3, 4, 5, 6) निर्माणाधीन हैं।
न्यूक्लियर फ्यूल की यह पहली खेप तीसरे रिएक्टर की कमिशनिंग की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
⭐ भारत और रूस के इंजीनियर मिलकर बढ़ा रहे हैं रिएक्टर की एफिशिएंसी
Rosatom ने यह भी बताया कि:
पहले फेज के दो रिएक्टरों में
- एडवांस्ड न्यूक्लियर फ्यूल
- एक्सटेंडेड फ्यूल साइकिल टेक्नोलॉजी
का उपयोग किया गया है, जिसे भारतीय और रूसी इंजीनियरों ने मिलकर विकसित किया।
इससे:
- रिएक्टर की क्षमता बढ़ी
- ईंधन की खपत कम हुई
- ऑपरेशन ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद हुआ
भारत-रूस की न्यूक्लियर साझेदारी दुनिया में एक मजबूत उदाहरण मानी जाती है।
⭐ पुतिन के भारत दौरे के बीच यह डिलीवरी क्यों अहम मानी जा रही है?
रूसी राष्ट्रपति का यह दौरा
- रणनीतिक
- आर्थिक
- रक्षा
और - ऊर्जा साझेदारी
के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पहली फ्यूल खेप का भारत पहुंचना इसलिए खास है क्योंकि:
✔ यह दोनों देशों के भरोसेमंद रिश्ते का मजबूत संकेत है
✔ कठिन वैश्विक माहौल के बावजूद न्यूक्लियर सहयोग जारी है
✔ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक मजबूती मिलती है
यह डिलीवरी सही समय पर हुई है और दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक संकेत देती है।
⭐ निष्कर्ष
भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम को रूस से पहली फ्यूल खेप मिलना
देश की न्यूक्लियर क्षमता को बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
रूस और भारत की ये न्यूक्लियर साझेदारी
- विज्ञान
- ऊर्जा
- सुरक्षा
तीनों क्षेत्रों में एक नई मजबूती देती है।
रिएक्टर-3 की लोडिंग अब तेज होगी, और जल्द ही इसकी कमिशनिंग शुरू होने की संभावना है।
(इनपुट: PTI)
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