डीपफेक पर YouTube का बड़ा प्रहार: AI से भ्रामक वीडियो बनाने वाले चैनलों की अब खैर नहीं, भारतीय चैनल समेत दो पर लगा स्थायी बैन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने जहां एक तरफ कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में क्रांति ला दी है, वहीं दूसरी तरफ इसके गलत इस्तेमाल ने बड़ी टेक कंपनियों की चिंता भी बढ़ा दी है। खासकर डीपफेक और मिसलीडिंग वीडियो को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अब इन सवालों पर YouTube ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है।
गूगल के स्वामित्व वाले वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म YouTube ने डीपफेक और AI-जेनरेटेड मिसलीडिंग वीडियो बनाने वाले दो चैनलों को पूरी तरह बैन कर दिया है, जिनमें से एक चैनल भारत से जुड़ा हुआ है। यह कदम साफ संकेत देता है कि अब AI के नाम पर दर्शकों को गुमराह करने वालों के लिए प्लेटफॉर्म पर कोई जगह नहीं बचेगी।
कौन से चैनल हुए बैन?

YouTube की इस सख्त कार्रवाई की जद में आए हैं दो चैनल—
- KH Studio (जॉर्जिया)
- Screen Culture (भारत)
इन दोनों चैनलों पर आरोप है कि ये AI की मदद से फर्जी और भ्रामक मूवी ट्रेलर बनाकर अपलोड कर रहे थे। इन वीडियो में असली फिल्मों के ऑफिशियल फुटेज के साथ AI-जेनरेटेड इमेज और क्लिप्स को इस तरह जोड़ा जाता था कि दर्शकों को लगता था कि यह किसी अपकमिंग फिल्म का असली ट्रेलर है।
कैसे किया जा रहा था AI का गलत इस्तेमाल?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये चैनल लोकप्रिय फिल्मों और वेब सीरीज के नाम पर:
- फर्जी ट्रेलर बनाते थे
- AI से बनाए गए कैरेक्टर और सीन जोड़ते थे
- असली एक्टर्स के चेहरे और आवाज से मिलती-जुलती डीपफेक क्लिप्स का इस्तेमाल करते थे
- भ्रामक टाइटल और थंबनेल लगाकर वीडियो अपलोड करते थे
इसका मकसद साफ था—व्यूज, लाइक्स और विज्ञापन से कमाई।
कई बार दर्शक यह समझ ही नहीं पाते थे कि वे जो देख रहे हैं, वह असली ट्रेलर नहीं बल्कि AI से बना हुआ कंटेंट है।
पहले रोकी गई थी कमाई, अब सीधा बैन
यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। YouTube ने पहले ही इन चैनलों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी।
- शुरुआत में इन चैनलों की मॉनेटाइजेशन (Ads) सस्पेंड की गई
- चैनलों को चेतावनी दी गई कि वे अपने कंटेंट में बदलाव करें
- पॉलिसी के अनुसार सुधार करने का मौका भी दिया गया
लेकिन इसके बावजूद इन चैनलों ने दोबारा स्पैम और मिसलीडिंग AI कंटेंट अपलोड करना जारी रखा। इसके बाद YouTube ने स्थायी बैन का फैसला लिया।
YouTube प्रवक्ता का बयान

YouTube के प्रवक्ता जैक मालोन ने इस मामले पर टेक वेबसाइट The Verge से बातचीत में कहा—
“शुरुआती सस्पेंशन के दौरान चैनलों को जरूरी बदलाव करने के लिए कहा गया था। लेकिन मॉनिटाइजेशन सस्पेंड होने के बाद भी इन चैनलों ने फिर से स्पैम और भ्रामक कंटेंट अपलोड किया। यह हमारी मिसलीडिंग मेटाडेटा पॉलिसी का स्पष्ट उल्लंघन है, इसलिए चैनलों को बैन किया गया।”
यह बयान साफ करता है कि YouTube अब चेतावनी देकर छोड़ने के मूड में नहीं है।
क्या है YouTube की कंटेंट पॉलिसी?

YouTube समय-समय पर अपनी कंटेंट पॉलिसी को अपडेट करता रहता है, खासकर जब कोई नई टेक्नोलॉजी तेजी से लोकप्रिय होती है। AI और डीपफेक को लेकर भी प्लेटफॉर्म ने साफ नियम बनाए हैं।
YouTube की पॉलिसी के मुताबिक:
- किसी भी तरह का मिसलीडिंग कंटेंट अपलोड करना प्रतिबंधित है
- दर्शकों को भ्रमित करने वाले टाइटल, थंबनेल और डिस्क्रिप्शन पॉलिसी का उल्लंघन हैं
- AI-जेनरेटेड वीडियो अगर असली कंटेंट के रूप में पेश किए जाएं, तो यह गलत है
- व्यूज और विज्ञापन कमाने के लिए फर्जी फुटेज या डीपफेक का इस्तेमाल बैन के दायरे में आता है
अगर कोई चैनल इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो YouTube को अधिकार है कि वह—
- वीडियो हटाए
- मॉनिटाइजेशन रोके
- या फिर चैनल को स्थायी रूप से बंद कर दे
डीपफेक क्यों बन गया है बड़ा खतरा?
डीपफेक टेक्नोलॉजी की मदद से किसी भी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या हावभाव नकली तरीके से तैयार किया जा सकता है। यही वजह है कि यह तकनीक:
- गलत जानकारी फैलाने
- सेलेब्रिटीज की छवि खराब करने
- फर्जी खबरें बनाने
- और ऑनलाइन धोखाधड़ी
जैसे मामलों में इस्तेमाल हो रही है।
फिल्म ट्रेलर जैसे मामलों में यह सीधे तौर पर दर्शकों के भरोसे के साथ धोखा है।
फिल्म इंडस्ट्री को भी हो रहा नुकसान
AI से बने फर्जी ट्रेलर सिर्फ दर्शकों को ही नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
- असली ट्रेलर से पहले फर्जी वीडियो वायरल हो जाते हैं
- दर्शकों की उम्मीदें गलत तरीके से बनती हैं
- मेकर्स और प्रोडक्शन हाउस की ब्रांड वैल्यू पर असर पड़ता है
यही वजह है कि पिछले कुछ समय से फिल्म स्टूडियो और प्रोडक्शन हाउस भी ऐसे चैनलों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
भारतीय डिजिटल क्रिएटर्स के लिए चेतावनी
Screen Culture जैसे भारतीय चैनल पर बैन लगना एक बड़ा संकेत है। भारत में तेजी से बढ़ रहे यूट्यूब और AI कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह एक कड़ी चेतावनी है।
अगर आप:
- AI से वीडियो बनाते हैं
- मूवी क्लिप्स या सेलेब्रिटी इमेज का इस्तेमाल करते हैं
- थंबनेल और टाइटल को जरूरत से ज्यादा भ्रामक बनाते हैं
तो आपको बेहद सावधान रहने की जरूरत है।
AI का सही इस्तेमाल बनाम गलत इस्तेमाल
YouTube ने यह साफ किया है कि वह AI टेक्नोलॉजी के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसके गलत इस्तेमाल के खिलाफ है।
- AI का उपयोग क्रिएटिव, एजुकेशनल और ट्रांसपेरेंट तरीके से किया जाए
- अगर वीडियो AI-जेनरेटेड है, तो उसे साफ तौर पर बताया जाए
- दर्शकों को भ्रमित करने की कोशिश न की जाए
यानी AI से बना कंटेंट तब तक ठीक है, जब तक वह ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ पेश किया जाए।
आगे और सख्ती की तैयारी?
टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में:
- YouTube AI कंटेंट के लिए अलग लेबलिंग अनिवार्य कर सकता है
- डीपफेक पहचानने के लिए और एडवांस टूल्स लगाए जा सकते हैं
- बड़े पैमाने पर चैनलों की जांच की जा सकती है
Meta, Instagram और TikTok जैसे प्लेटफॉर्म भी पहले ही डीपफेक को लेकर सख्त नियम बना चुके हैं।
यूजर्स के लिए भी जरूरी सतर्कता
सिर्फ कंटेंट क्रिएटर्स ही नहीं, बल्कि दर्शकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
- किसी भी वीडियो को देखकर तुरंत विश्वास न करें
- ऑफिशियल चैनल और सोर्स चेक करें
- अगर कोई वीडियो संदिग्ध लगे, तो रिपोर्ट करें
यूजर्स की रिपोर्टिंग से भी ऐसे कंटेंट पर कार्रवाई तेज होती है।
निष्कर्ष
YouTube द्वारा भारतीय चैनल समेत दो AI-आधारित चैनलों पर लगाया गया बैन यह साफ संदेश देता है कि डीपफेक और मिसलीडिंग कंटेंट का दौर अब ज्यादा लंबा नहीं चलने वाला।
AI एक ताकतवर टूल है, लेकिन उसका इस्तेमाल अगर गलत मकसद से किया गया, तो उसका अंजाम चैनल बंद होने तक पहुंच सकता है।
अगर आप भी YouTube पर कंटेंट बनाते हैं, तो याद रखें—
व्यूज से ज्यादा जरूरी है भरोसा, और भरोसे के साथ खिलवाड़ की अब कोई जगह नहीं।
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