क्रेडिट कार्ड यूजर की हो जाए मौत तो कौन चुकाएगा बकाया रकम? जानें पूरे नियम और RBI की गाइडलाइंस
आज के डिजिटल दौर में क्रेडिट कार्ड सिर्फ एक पेमेंट टूल नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल जरूरत बन चुका है। शॉपिंग, ट्रैवल, ऑनलाइन पेमेंट, EMI, कैशबैक और रिवॉर्ड्स के चलते खासकर युवाओं में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि अगर किसी क्रेडिट कार्ड यूजर की अचानक मौत हो जाए, तो उसके कार्ड पर बकाया रकम का क्या होता है? क्या यह जिम्मेदारी परिवार पर आती है या बैंक खुद इसे माफ करता है? आइए आसान भाषा में पूरे नियम समझते हैं।
क्या परिवार को चुकाना पड़ता है क्रेडिट कार्ड का बकाया?

सीधा और साफ जवाब है—नहीं, परिवार को व्यक्तिगत रूप से क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
क्रेडिट कार्ड एक अनसिक्योर्ड लोन होता है, यानी इसके बदले बैंक के पास कोई गारंटी नहीं होती। इसकी जिम्मेदारी केवल उसी व्यक्ति की होती है, जिसके नाम पर कार्ड जारी किया गया है।
👉 कार्ड होल्डर की मौत के बाद:
- बैंक परिवार के सदस्यों से जबरन वसूली नहीं कर सकता
- बच्चों, माता-पिता या जीवनसाथी पर कानूनी रूप से कोई व्यक्तिगत देनदारी नहीं बनती
तो बैंक अपना पैसा कैसे वसूल करता है?

हालांकि परिवार पर सीधा बोझ नहीं डाला जाता, लेकिन बैंक के पास कुछ कानूनी विकल्प होते हैं:
🔹 1. मृतक की संपत्ति (Assets) से वसूली
अगर कार्ड होल्डर के नाम पर:
- बैंक बैलेंस
- FD
- म्यूचुअल फंड
- शेयर
- प्रॉपर्टी
जैसी संपत्तियां मौजूद हैं, तो बैंक कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हीं से बकाया रकम वसूल सकता है।
⚠️ ध्यान देने वाली बात:
- वसूली सिर्फ मृतक की संपत्ति की सीमा तक ही हो सकती है
- अगर संपत्ति की वैल्यू कम है, तो बैंक पूरा पैसा नहीं मांग सकता
🔹 2. बकाया रकम संपत्ति से ज्यादा हो तो क्या?
मान लीजिए:
- क्रेडिट कार्ड बकाया: ₹5 लाख
- मृतक की कुल संपत्ति: ₹3 लाख
तो बैंक:
- ₹3 लाख तक ही वसूली कर सकता है
- बाकी ₹2 लाख को Bad Debt या NPA (Non-Performing Asset) मान लिया जाता है
👉 इस स्थिति में परिवार से अतिरिक्त रकम नहीं मांगी जा सकती।
क्या जॉइंट कार्ड या एड-ऑन कार्ड में नियम अलग हैं?

यहां थोड़ा ध्यान देना जरूरी है:
🔸 Addon Credit Card
- अगर मृतक प्राइमरी कार्ड होल्डर था
- और परिवार के सदस्य एड-ऑन कार्ड यूजर थे
तो:
- पूरा बकाया प्राइमरी कार्ड होल्डर की जिम्मेदारी माना जाएगा
- एड-ऑन यूजर पर अलग से कोई देनदारी नहीं बनती
🔸 Joint Account जैसा कोई सिस्टम नहीं
क्रेडिट कार्ड आमतौर पर जॉइंट नहीं होते, इसलिए परिवार की संयुक्त जिम्मेदारी नहीं बनती।
FD-बैक्ड या सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड का क्या होगा?
अगर क्रेडिट कार्ड:
- FD के बदले लिया गया है
- या किसी सिक्योरिटी से लिंक है
तो बैंक:
- उस FD या सिक्योरिटी को भुना (Encash) कर
- बकाया रकम वसूल सकता है
👉 इसमें परिवार की अनुमति जरूरी नहीं होती, क्योंकि FD पहले से बैंक के पास गिरवी होती है।
RBI की गाइडलाइंस क्या कहती हैं?
RBI ने बैंकों और रिकवरी एजेंट्स के लिए सख्त नियम बनाए हैं:
✔️ परिवार को धमकाना गैरकानूनी
✔️ मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न की मनाही
✔️ रिश्तेदारों, दोस्तों या रेफरेंस को कॉल कर परेशान नहीं किया जा सकता
✔️ सार्वजनिक रूप से बदनाम करना अपराध है
अगर कोई बैंक या रिकवरी एजेंट ऐसा करता है, तो परिवार:
- बैंक में शिकायत
- RBI Banking Ombudsman
- या कंज्यूमर कोर्ट
का रुख कर सकता है।
क्या क्रेडिट कार्ड इंश्योरेंस मदद करता है?
कुछ क्रेडिट कार्ड्स के साथ:
- Credit Shield Insurance
- या Personal Accident Cover
मिलता है। अगर ऐसा कवर मौजूद है, तो:
- इंश्योरेंस कंपनी बकाया रकम चुका देती है
- परिवार पूरी तरह सुरक्षित रहता है
👉 इसलिए क्रेडिट कार्ड लेते समय इसके इंश्योरेंस बेनिफिट्स जरूर चेक करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
✔️ क्रेडिट कार्ड यूजर की मौत पर परिवार पर सीधा कर्ज नहीं आता
✔️ बैंक केवल मृतक की संपत्ति से ही वसूली कर सकता है
✔️ संपत्ति न होने पर बकाया रकम NPA मानी जाती है
✔️ RBI परिवार को परेशान करने से बैंकों को रोकता है
👉 समझदारी यही है कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, समय पर भुगतान करें और इंश्योरेंस कवर जरूर चेक करें।
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