शुभमन गिल के साथ हुआ ‘धोखा’ या टीम मैनेजमेंट का कठोर फैसला?
टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर होने के पीछे की पूरी कहानी
भारतीय क्रिकेट में जब भी टीम चयन होता है, तो बहस तय मानी जाती है। लेकिन टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम के ऐलान ने जिस तरह से हलचल मचाई, वैसी चर्चा लंबे समय बाद देखने को मिली। वजह साफ है—भारत के टेस्ट और वनडे कप्तान शुभमन गिल का नाम टी20 वर्ल्ड कप स्क्वाड में नहीं होना। उससे भी बड़ा सवाल यह कि क्या गिल को इस फैसले की पहले से कोई जानकारी थी? हालिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से जो बातें सामने आई हैं, उन्होंने चयन प्रक्रिया और टीम मैनेजमेंट की पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब टीम का ऐलान हुआ और सब चौंक गए

बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने जैसे ही टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया, सोशल मीडिया और क्रिकेट गलियारों में चर्चा तेज हो गई। फैंस को उम्मीद थी कि भले ही गिल टी20 में हालिया समय में उतनी धमाकेदार फॉर्म में न हों, लेकिन उनके कद, निरंतरता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें टीम में जगह मिलेगी। मगर स्क्वाड में उनका नाम दूर-दूर तक नहीं था।
यहीं से सवाल उठने लगे—क्या गिल को पूरी तरह टी20 योजनाओं से बाहर कर दिया गया है? और अगर हां, तो क्या यह फैसला उन्हें पहले से बता दिया गया था?
“बिना बताए ड्रॉप” होने का आरोप
एनडीटीवी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई के एक अंदरूनी सूत्र ने बड़ा खुलासा किया। सूत्र के अनुसार, शुभमन गिल को टी20 वर्ल्ड कप स्क्वाड से बाहर किए जाने की कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई थी। न तो चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर ने, न ही हेड कोच गौतम गंभीर ने और न ही कप्तान सूर्यकुमार यादव ने गिल से इस बारे में कोई बातचीत की।
अगर यह बात सही है, तो यह भारतीय क्रिकेट के लिए एक गंभीर मुद्दा बन जाता है। आमतौर पर इतने बड़े खिलाड़ी, जो टेस्ट और वनडे टीम की कप्तानी संभाल रहे हों, उनसे चयन से पहले या कम से कम निर्णय के बाद संवाद किया जाना अपेक्षित माना जाता है।
कप्तानी बनाम फॉर्म: दोहरा मापदंड?
इस पूरे मामले में एक और पहलू ने बहस को और हवा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव खुद भी हालिया समय में खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद उनका कप्तानी पद कम से कम वर्ल्ड कप तक सुरक्षित माना जा रहा है।
यही वह बिंदु है, जहां चयन नीति पर सवाल उठते हैं। अगर खराब फॉर्म के बावजूद कप्तान को समय दिया जा सकता है, तो फिर गिल के साथ अलग रवैया क्यों? क्या यह केवल फॉर्म का मामला है या फिर टीम मैनेजमेंट की टी20 रणनीति में गिल फिट नहीं बैठते?
दक्षिण अफ्रीका सीरीज और चोट की कहानी
शुभमन गिल के बाहर होने की पटकथा शायद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज के दौरान ही लिखी जा चुकी थी। उसी सीरीज में गिल के पैर में चोट लगी थी, जिसके बाद वह कुछ मैचों से बाहर रहे। शुरुआती खबरों में कहा गया कि चोट गंभीर हो सकती है, यहां तक कि फ्रैक्चर की आशंका भी जताई गई।
लेकिन बाद में मेडिकल टीम की जांच में यह साफ हो गया कि चोट उतनी गंभीर नहीं थी। सूत्रों के अनुसार, गिल अहमदाबाद में खेले गए पांचवें टी20 मैच में खेलने के लिए उपलब्ध थे और खुद भी खेलने के इच्छुक थे।
खेलने की इच्छा, लेकिन पहले से तय फैसला?
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि गिल के खेलने की इच्छा के बावजूद टीम मैनेजमेंट ने उन्हें अंतिम मैच से बाहर रखने का फैसला पहले ही कर लिया था। यानी चोट सिर्फ एक बहाना थी, जबकि असल में टीम मैनेजमेंट गिल के बिना आगे बढ़ने की योजना बना चुका था।

यह बात अगर सही है, तो यह दर्शाता है कि चयनकर्ताओं और कोचिंग स्टाफ ने गिल को टी20 भविष्य की योजनाओं से लगभग बाहर मान लिया था—और वह भी बिना खिलाड़ी को स्पष्ट रूप से बताए।
गौतम गंभीर की सोच और नई टी20 रणनीति
गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद से यह माना जा रहा है कि टीम इंडिया टी20 फॉर्मेट में एक नई, आक्रामक सोच के साथ आगे बढ़ रही है। युवा, निडर और तेज रन बनाने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी कड़ी में कई नए चेहरों को मौके मिले हैं।
शुभमन गिल की बल्लेबाजी शैली तकनीकी रूप से मजबूत मानी जाती है, लेकिन टी20 में उन पर अक्सर “धीमी शुरुआत” का आरोप लगता रहा है। संभव है कि गंभीर और टीम मैनेजमेंट को लगा हो कि गिल टी20 के मौजूदा टेम्पलेट में फिट नहीं बैठते।
चयनकर्ताओं की चुप्पी और अधूरे जवाब
टीम ऐलान के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर से शुभमन गिल के बाहर होने पर सवाल पूछा गया, तो उनका जवाब कई लोगों को संतोषजनक नहीं लगा। उन्होंने सीधे तौर पर यह नहीं बताया कि गिल को क्यों ड्रॉप किया गया और न ही यह स्पष्ट किया कि क्या खिलाड़ी से इस बारे में कोई संवाद हुआ था।
इस चुप्पी ने ही “धोखा” और “बिना बताए बाहर करने” जैसे आरोपों को और मजबूत किया।
क्या यह धोखा है या पेशेवर फैसला?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या शुभमन गिल के साथ वाकई धोखा हुआ है, या यह सिर्फ एक कठोर लेकिन पेशेवर क्रिकेटिंग फैसला है?
क्रिकेट में चयन और बाहर होना खेल का हिस्सा है। कई दिग्गज खिलाड़ी भी बड़े टूर्नामेंट से बाहर हुए हैं। लेकिन अंतर संवाद का होता है। अगर किसी खिलाड़ी को स्पष्ट रूप से बता दिया जाए कि उसे किस वजह से बाहर किया जा रहा है, तो विवाद कम होता है।
यहां समस्या यह बताई जा रही है कि गिल को जानकारी ही नहीं दी गई।
गिल का कद और भविष्य की तस्वीर
शुभमन गिल आज भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं। टेस्ट और वनडे टीम की कप्तानी उनके हाथों में है। उन्होंने लगातार प्रदर्शन से खुद को साबित किया है और उन्हें भविष्य का सुपरस्टार माना जाता है।
ऐसे में टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके करियर पर स्थायी दाग नहीं माना जा सकता। बल्कि यह भी संभव है कि टीम मैनेजमेंट उन्हें रेड-बॉल और 50 ओवर क्रिकेट पर ज्यादा फोकस करने देना चाहता हो।
फैंस की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया का शोर
टीम ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर फैंस दो धड़ों में बंट गए। एक वर्ग का मानना है कि गिल को टी20 में और मौके मिलने चाहिए थे, खासकर तब जब दूसरे खिलाड़ी भी खराब फॉर्म में हैं। वहीं दूसरा वर्ग इसे सही फैसला बता रहा है और कह रहा है कि टी20 में सिर्फ वर्तमान फॉर्म और स्ट्राइक रेट मायने रखता है।
आगे क्या?
फिलहाल शुभमन गिल या बीसीसीआई की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। गिल ने भी सार्वजनिक रूप से इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, जो उनके शांत और पेशेवर स्वभाव को दर्शाता है।
आने वाले समय में अगर गिल टी20 क्रिकेट में दमदार वापसी करते हैं, तो चयनकर्ताओं पर दबाव जरूर बढ़ेगा। वहीं अगर टीम इंडिया टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अच्छा प्रदर्शन करती है, तो यह फैसला सही ठहराया जाएगा।
निष्कर्ष
शुभमन गिल को टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर किया जाना सिर्फ एक चयन खबर नहीं है, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट की चयन नीति, संवाद प्रक्रिया और भविष्य की रणनीति पर बड़ा सवाल है।
क्या यह एक सोची-समझी रणनीति थी या संवाद की कमी से उपजा विवाद—इसका जवाब शायद वक्त ही देगा। लेकिन इतना तय है कि यह मामला लंबे समय तक क्रिकेट चर्चा का हिस्सा बना रहेगा।
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