ऑस्कर में इतिहास रचेगी ये मराठी फिल्म? ‘होमबाउंड’ को पीछे छोड़ ‘दशावतार’ ने पक्की की अपनी जगह, बॉक्स ऑफिस पर भी रही सुपरहिट
मराठी सिनेमा के लिए यह पल ऐतिहासिक साबित हो सकता है। मराठी भाषा की सुपरहिट फिल्म ‘दशावतार’ ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे भारतीय फिल्म जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ऑस्कर 2026 की दौड़ में शामिल होते हुए इस फिल्म ने दुनियाभर से आई 2000 से ज्यादा फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए टॉप 150 फिल्मों में जगह बना ली है। यही नहीं, इस रेस में इसने चर्चित भारतीय फिल्म ‘होमबाउंड’ को भी पछाड़ते हुए अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
ऑस्कर की रेस में ‘दशावतार’ की दमदार एंट्री

ऑस्कर अवॉर्ड्स के लिए फिल्मों का चयन एक लंबी और कड़ी प्रक्रिया से गुजरता है। दुनिया भर से भेजी गई करीब 2000 फिल्मों में से सिर्फ 150 से 250 फिल्मों को ही अलग-अलग कैटेगरी में आधिकारिक दावेदारों की सूची में शामिल किया जाता है। ऐसे में ‘दशावतार’ का इस लिस्ट में पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
खास बात यह है कि ‘दशावतार’ इस श्रेणी में चयनित होने वाली पहली मराठी फीचर फिल्म बन गई है, जिसने अब तक हॉलीवुड और बड़े अंतरराष्ट्रीय स्टूडियो के दबदबे वाले मंच पर अपनी पहचान बनाई है। यह उपलब्धि न सिर्फ फिल्म के मेकर्स के लिए, बल्कि पूरे मराठी और भारतीय रीजनल सिनेमा के लिए गर्व का विषय है।
ऑस्कर स्क्रीनिंग रूम तक पहुंची पहली मराठी फिल्म
‘दशावतार’ ने एक और इतिहास रच दिया है। यह फिल्म ऑस्कर स्क्रीनिंग रूम में प्रदर्शित होने वाली पहली मराठी फीचर फिल्म बन गई है। ऑस्कर स्क्रीनिंग रूम वह आधिकारिक मंच है, जहां अकादमी के सदस्य फिल्मों को देखते हैं और वोटिंग से पहले उनका मूल्यांकन करते हैं।
इसका मतलब साफ है—अब ‘दशावतार’ सीधे उन ज्यूरी मेंबर्स की नजर में है, जो ऑस्कर विजेताओं का फैसला करते हैं। इससे फिल्म की ग्लोबल विजिबिलिटी कई गुना बढ़ गई है और इसके अंतिम सूची (शॉर्टलिस्ट या नॉमिनेशन) में पहुंचने की उम्मीद भी मजबूत हो गई है।
‘होमबाउंड’ से आगे निकली ‘दशावतार’
इस साल ऑस्कर की दावेदारी सूची में भारत से फिलहाल दो ही फिल्मों ने जगह बनाई है—एक है चर्चित फिल्म ‘होमबाउंड’, और दूसरी मराठी फिल्म ‘दशावतार’। हालांकि फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि रीजनल सिनेमा होने के बावजूद ‘दशावतार’ की कहानी, ट्रीटमेंट और सिनेमैटिक अपील इसे बाकी फिल्मों से अलग बनाती है।
यही वजह है कि शुरुआती राउंड में ही इसने ‘होमबाउंड’ जैसी चर्चित फिल्म को पीछे छोड़ते हुए टॉप 150 में अपनी जगह पक्की कर ली है। आने वाले दिनों में अगर और भारतीय फिल्मों के नाम सामने आते हैं, तब भी ‘दशावतार’ की यह बढ़त इसे मजबूत दावेदार बनाती है।
बॉक्स ऑफिस पर भी रहा सुपरहिट प्रदर्शन

अंतरराष्ट्रीय पहचान के साथ-साथ ‘दशावतार’ ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार प्रदर्शन किया है। सीमित बजट और मराठी भाषा की फिल्म होने के बावजूद इसने दर्शकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स हासिल किया। वर्ड ऑफ माउथ और मजबूत कंटेंट के दम पर फिल्म ने न सिर्फ लागत निकाली, बल्कि सुपरहिट का दर्जा भी हासिल किया।
क्रिटिक्स ने फिल्म की:
- दमदार कहानी
- सांस्कृतिक गहराई
- शानदार अभिनय
- और तकनीकी मजबूती
की जमकर तारीफ की है।
स्टारकास्ट और मेकर्स की मेहनत लाई रंग
‘दशावतार’ में दिलीप प्रभावलकर, प्रियदर्शनी इंदलकर, सिद्धार्थ मेनन, महेश मांजरेकर जैसे मंझे हुए कलाकार नजर आए हैं। इन कलाकारों के सशक्त अभिनय ने फिल्म को एक अलग स्तर पर पहुंचाया। फिल्म की कहानी भारतीय संस्कृति, मिथक और आधुनिक संवेदनाओं का ऐसा मेल पेश करती है, जो विदेशी दर्शकों को भी जोड़ने में सक्षम है।
मराठी और भारतीय सिनेमा के लिए बड़ी जीत
फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि ‘दशावतार’ की यह सफलता रीजनल सिनेमा के लिए नए दरवाजे खोल सकती है। यह साबित करता है कि भाषा की सीमाएं अब कंटेंट के सामने कमजोर पड़ रही हैं। अगर फिल्म आगे चलकर ऑस्कर नॉमिनेशन या अवॉर्ड तक पहुंचती है, तो यह मराठी सिनेमा के इतिहास का सबसे सुनहरा अध्याय बन सकता है।
नजरें अगले एलान पर
अब सभी की नजरें ऑस्कर की अगली शॉर्टलिस्ट और नॉमिनेशन अनाउंसमेंट पर टिकी हैं। क्या ‘दशावतार’ वहां भी अपनी जगह बना पाएगी? क्या यह फिल्म ऑस्कर में भारत और मराठी सिनेमा के लिए इतिहास रचेगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले हफ्तों में मिलेंगे, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि ‘दशावतार’ ने ऑस्कर की दौड़ में भारत की उम्मीदों को नई उड़ान दे दी है।
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